हर शाम चाँद नए चेहरों में सजता है
तेरी याद में चराग नहीं दिल जलता है
मैं खरीदारों की मानिंद खामोश खड़ा हूँ
तेरी मुहब्बत का बाज़ार जहाँ लगता है
तमाम उम्र जो अपने साये के पीछे चला है
मंजिल पे आके आज अपने साये से डरता है
हालात ही ऐसे है की वो छत पे आकर
हाल-ऐ-दिल इशारों में बयां करता है
शीशे के घरों में रहकर भी 'हरीश'
रह-रह कर रेत के घरोंदों की बात करता है....
तेरी याद में चराग नहीं दिल जलता है
मैं खरीदारों की मानिंद खामोश खड़ा हूँ
तेरी मुहब्बत का बाज़ार जहाँ लगता है
तमाम उम्र जो अपने साये के पीछे चला है
मंजिल पे आके आज अपने साये से डरता है
हालात ही ऐसे है की वो छत पे आकर
हाल-ऐ-दिल इशारों में बयां करता है
शीशे के घरों में रहकर भी 'हरीश'
रह-रह कर रेत के घरोंदों की बात करता है....






